101+ किसान शायरियाँ और स्टेटस | 101+ kisan Shayari and Status in Hindi

किसान शायरियाँ, किसान दिवस शुभकामनाएँ और एटीट्यूड स्टेटस | Kisan Shayari, kisan Day and attitude status in Hindi

किसान के जीवन का दूसरा नाम कठोर परिश्रम और त्याग है. किसान वह होता है जो मिट्टी से सोना उत्पन्न कर सकता है. तपती धुप, कंडकती सर्दी और घनघोर वर्षा में तपस्वी की भाँति वह अपने काम में अडिग रहते है. सभी ऋतुएँ उसके सामने हँसती-खेलती निकल जाती हैं और वह उनका आनंद लेते है. जिस तरह सृष्टि का पालन विष्णु भगवान् का कार्य है और मानव-समाज का पालन किसान का धर्म है, इसीलिए यह कहते है की, किसान में हम भगवान् विष्णु के दर्शन कर सकते हैं.

जय जीवन जय किसान

लाल बहादुर शास्त्री

किसान खुश है, बारिश खूब हुई है अबकी बरस,
खेत सींच दी है पर मकान का छत तोड़ दी है,
नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले
बदल देते हैं और कामयाब लोग अपने फैसले से
पूरी दुनिया बदल देते हैं

जो इंसान एक जगह शांत हो कर
बैठना सीख लेता है वो जीवन में
कुछ भी हासिल कर सकता है

धुप में सब कुछ सुख जाता है छोड़कर 
किसानो के पसीने को अफ़सोस फिर 
भी उनको मेहनत का फल नहीं मिलता

इंतज़ार मत करो
जितना तुम सोचते हो
जिंदगी उससे कहीं ज्यादा
तेजी से निकल रही है

अपनी जिंदगी से कभी नाराज मत होना
क्या पता आप जैसे जिंदगी किसी का सपना हो

लोग कहते हैं बेटी को मार डालोगे,
तो बहू कहाँ से पाओगे? जरा सोचो
किसान को मार डालोगे, तो रोटी
कहाँ से लाओगे?

खुद को बदलने का सबसे तेज तरीका है,
उन लोगों के साथ रहना जो
पहले से ही उस रस्ते पर है
जिस पर आप जाना चाहते हैं

किसान के लड़के ने अपने नाम के
आगे “डाक्टर” जोड़ लिया, गाँव में
हल ने कोने में पड़े-पड़े दम तोड़ दिया

दूसरों को सोता और मौज करता देख भी जो
लोग पढ़ते है और मेहनत करते है
वो निश्चित ही एक दिन इतिहास रचते है

कह दो किस्मत से हम
न तुम्हें कभी पुकारेंगे न हम हारे थे
न हम कभी हारेंगे
कहाँ ले जाओगे किसान के हक का दाना,
इस दुनिया को एक दिन तुमको भी है छोड़ जाना

किस्मत को छोड़ो,
जब मेहनत का सिक्का उछलता है,
तब Head भी तुम्हारा होता है और
tail भी तुम्हारा होता है

 बिना मेहनत की कमाई को उड़ाते देखा है
मेने चंद रुपयों के लिए किसान को बेल की
जगह हल चलाते देखा है मेने

मत मारो गोलियो से मुझे,
मैं पहले से एक दुखी इंसान हूँ,
मेरी मौत कि वजह यही हैं,
कि मैं पेशे से एक किसान हूँ

एक बार आकर देख कैसा,
ह्रदय विदारक मंजर हैं,
पसलियों से लग गयी हैं आंते,
खेत अभी भी बंजर हैं

जैसा आप सोचोगे वैसा ही बनौगे
तौ इसलिए सोच हमेशा बड़ी रखो

किसी को पता नही कितना किसानों का हाल बेहाल है
सरकार कागजी तरक्की से खूब खुशहाल है

सफलता एक चुनौती है इसे स्वीकार करो
क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो
कुछ किए बिना ही जय जयकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

किसान की समस्या खत्म नही होती,
नेताओ के पास पैकेज अस्सी हैं,
अंत में समस्या खत्म करने के लिए,
किसान चुनता रस्सी हैं.

कामयाबी के सफ़र में मुश्किलें तो आएँगी ही,
परेशानियाँ दिखाकर तुमको तो डराएंगी ही,
चलते रहना कि कदम रुकने ना पायें,
अरे मौत से क्या डरना एक दिन तो आएगी ही..

अभी न निकली पहली किरण पूर्व की लाली
पहचान,भौर से पहले ही , खाट छोड़ उठ
गया किसान.

ज़िन्दगी में हमेशा
एक बात ध्यान रखना
जो चीज़ कमा सकते हो
उसे मांगना बंद करो


परिश्रम की मिशाल हैं, जिस पर कर्जो के निशान हैं,
घर चलाने में खुद को मिटा दिया, और कोई नही वह किसान हैं.

बढ़ रही हैं कीमते अनाज की,
पर हो न सकी विदा बेटी किसान की.

छत टपकती हैं उसके कच्चे मकान की,
फिर भी “बारिश” हो जाये, तमन्ना हैं किसान की.

हमने भी कितने पेड़ तोड़ दिए,
संसद की कुर्सियों में जोड़ दिए,
कुआँ बुझा दिए, नदियाँ सुखा दिए,
विकास की ताकत से कुदरत को झुका दिए.

किसान खुश है, बारिश खूब हुई है अबकी बरस,
खेत सींच दी है पर मकान का छत तोड़ दी है,

जमीन जल चुकी है लकिन आसमान अभी बाकी है,
कुए सुख चुके है लेकिन उम्मीद अभी बाकि है.. !!
ए बारिश.. इस बार जरूर बरस जाना,
किसी का मकान गिरवी तो किसी का लगान बाकी है!

नंगे पैर बारिश में जब
एक किसान खेतो में जाता है,
तभी महकता हुआ बासमती
आपके घर आता है

कोई परेशान है कुर्सी के लिए.
कोई ख्वाहिशो के लिए.
और एक किसान परेशान है,
उधार के किश्तों और रोटी के लिए

Kisan Status

जब किसान अपने बेटे को पढ़ाता हैं,
तो कई रात वो भूखा ही सो जाता हैं.

जो किसान अपने बच्चों को
बड़े शहर भेजता है,
वो उन की खुशियों को
दिल पर पत्थर रखकर बेचता हैं.

ग़रीब के बच्चे भी खाना
खा सके त्योहारों में,
तभी तो भगवान खुद
बिक जाते हैं बाजारों में.

क्या दिखा नही वो खून तुम्हें,
जहाँ धरती पुत्र का अंत हुआ,
सच को ये सच नही मान रहा,
लो आँखों से अँधा भक्त हुआ.

खेतों को जब पानी की जरूरत होती है,
तो आसमान बरसता है या तो आँखें

कितने अजब रंग समेटे हैं,
ये बेमौसम बारिश खुद में,
अमीर पकौड़े खाने की सोच
रहा हैं तो किसान जहर

किस लोभ से “किसान” आज भी,
लेते नही विश्राम हैं,
घनघोर वर्षा में भी
करते निरंतर काम हैं.

दीवार क्या गिरी किसान
के कच्चे मकान की,
नेताओ ने उसके आँगन
में रस्ता बन दिया

नही हुआ हैं अभी सवेरा,
पूरब की लाली पहचान,
चिडियों के उठने से पहले,
खाट छोड़ उठ गया किसान

मुफ़्त की कोई चीज बाजार में नहीं मिलती,
किसान के मरने की सुर्खियां अखबार में नहीं मिलती

एक ईमानदार किसान को डरे सहमे हुए देखा है,
मेहनत करने के बावजूद भूख से लड़ते हुए देखा है,

लोग कहते हैं बेटी को मार डालोगे,
तो बहू कहाँ से पाओगे
जरा सोचो किसान को मार डालोगे,
तो रोटी कहाँ से लाओगे

किसान की आह जो दिल से निकाली जाएगी
क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी

किसान खुल के हँस तो रहा हैं
फ़क़ीर होते हुए,नेता मुस्कुरा
भी न पाया अमीर होते हुए.

मर रहा सीमा पर जवान और खेतों में किसान,
कैसे कह दूँ इस दुखी मन से कि मेरा भारत महान.

ज़िन्दगी के नगमे कुछ यूँ गाता,
मेहनत मजदूरी करके खाता,
सद्बुद्धि सबको दो दाता,
हम है, अगर हैं अन्नदाता

फूल खिला दे शाखों पर,
पेड़ों को फल दे मालिक,
धरती जितनी प्यासी हैं
उतना तो जल दे मालिक.

किसान की समस्या खत्म नही होती,
नेताओ के पास पैकेज अस्सी हैं,
अंत में समस्या खत्म करने के लिए,
किसान चुनता रस्सी हैं.

भगवान का सौदा करता हैं,
इंसान की क़ीमत क्या जाने?
जो “धान” की क़ीमत दे न सक,
वो “जान ” की क़ीमत क्या जाने?

कोई परेशान हैं
सास-बहू के रिश्तो में,
किसान परेशान हैं
कर्ज की किश्तों में

ये सिलसिला क्या यूँ
ही चलता रहेगा, सियासत
अपनी चालों से कब तक
किसान को छलता रहेगा

मत मारो गोलियो से मुझे
मैं पहले से एक दुखी इंसान हूँ,
मेरी मौत कि वजह यही हैं
कि मैं पेशे से एक किसान हूँ.

जिसकी आँखो के आगे
किसान पेड़ पे झूल गया, 
देख आईना तू भी बन्दे,
कल जो किया वो भूल गया

उन घरो में जहाँ मिट्टी के घड़े रहते हैं, 
कद में छोटे हो, मगर लोग बड़े रहते हैं.

किसान खेत में मरता है
और किसान का बेटा फ़ौज में
नेता देश में ऐश करता है ,
और उसका बेटा विदेश मे
आखिर कब तक

घटाएँ उठती हैं
बरसात होने लगती है,
जब आँख भर के फ़लक
को किसान देखता है

किसान के लड़के ने अपने
नाम के आगे “डाक्टर” जोड़ लिया,
गाँव में हल ने कोने में
पड़े-पड़े दम तोड़ दिया

मेरी नींद को दिक्कत ना
भजन से ना अजान से है,
मेरी नींद को दिक्कत पिटते
हुवे जवान और खुदखुशी करते किसान से है

तापमान तो AC और कूलर वालो
के लिए बढा है साहब
खेत में किसान और सीमापर जवान
तो आज भी वहीं है

कहा रख दू अपने हिस्से की शराफ़त
जहाँ देखूं वहां बेईमान ही खडे है
क्या खूब बढ़ रहा है वतन देखिये
खेतों में बिल्डर सड़क पे किसान खड़े है

गांव से शहर घूमने आये एक
किसान ने क्या खूब लिखा है,
चिन्ता वहाँ भी थी चिन्ता यहाँ भी हैं,
गांव में तो केवल फसले ही खराब होती थी,
शहर में तो पूरी नस्ले ही खराब है !

देवताओं से भी हल नहीं हुई,
जिन्दगी कही सरल नही हुई,
कि अबके साल फिर यही हुआ
अबके साल फिर फसल नही हुई.

जब कोई किसान या जवान मरता है,
तो समझना पूरा हिन्दुस्तान मरता है.

देर शाम खेत से किसान घर नहीं आता है,
तो बच्चों का मासूम दिल सहम जाता है.

कहाँ ले जाओगे किसान
के हक का दाना,
इस दुनिया को एक
दिन तुमको भी है छोड़ जाना

ये सिलसिला क्या यूँ ही चलता रहेगा,
सियासत अपनी चालों से
कब तक किसान को छलता रहेगा.

एक बार आकर देख कैसा,
ह्रदय विदारक मंजर हैं,
पसलियों से लग गयी हैं आंते,
खेत अभी भी बंजर हैं.

Kisan Day Status

हकीकत में किसान ही इस देश 
को चलाते है वही खाने को अनाज 
देते है, वही चुन कर सरकार देते है.
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

प्रयास छोटा ही सही लेकिन लगातार
होना चाहिए,बारिश की बूंदे भले ही
छोटी हो, लेकिन उनका लगातार
बरसना बड़ी नदी का बहाव बन जाता है.
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

मेरा भारत महान है क्योंकी
मेरे देश की पहचान किसान है,
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाये
 

 कामयाबी हाथों की लकीरों में नहीं
माथे के पसीने में हैं, वो मजा आम
जिंदगी में कहाँ जो बिंदास जीने में है.
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाये 

किसान वो भगवान हैं जो खुद का पेट
खाली रख कर,दूसरों का पेट भरता हैं
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

कामयाबी उन्ही को हासिल होती है
जिनकें हौसलों में जान होती है पंखों
से कुछ नहीं होता,हौसलों से उड़ान होती है
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

जो घर बैठी माँ को माँ पुकारे वो इंसान है
माँ से पहले देश की माटी को माँ पुकारे, वो मेरा हिंदूस्तान है
जो इस माटी का कर्ज चुकाए बिना कोई लोभ
वो इस माटी कि असल संतान मेरे देश का किसान है
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

जमीन जल चुकी है आसमान बाकी है
सूखे कुएँ तुम्हारा इम्तहान बाकी है
वो जो खेतों की मेढ़ों पर उदास बैठे हैं
उनकी आखों में अब तक ईमान बाकी है
बादलों बरस जाना समय पर इस बार
किसी का मकान गिरवी तो किसी का लगान बाकी है
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

मत मारो गोलियो से मुझे
मैं पहले से एक दुखी इंसान हूँ
मेरी मौत कि वजह यही हैं
कि मैं पेशे से एक किसान हूँ
हैप्पी किसान दिवस

कट गए है हाथ जो उगाते है देश लिए अनाज
बढ गई है जनसंख्या, कम हो गए है किसान
अब तो बस चारो तरफ दिखते है होटलें और मकान ही मकान
कहा से लाए खेत और खलिहाल
क्या करेंगा अब मेरे देश का किसान
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


भगवान का सौदा करता हैं
इंसान की क़ीमत क्या जाने?
जो “धान” की क़ीमत दे न सके
वो “जान ” की क़ीमत क्या जाने?
हैप्पी किसान दिवस

मैं किसान हूँ मुझे भरोसा हैं अपने जूनून पर
निगाहे लगी हुई है आकाश के मानसून पर
हैप्पी फार्मर डे

तन के कपड़े भी फट जाते है, तब कहीं एक फसल लहलहाती है
और लोग कहते है किसान के जिस्म से पसीने की बदबू आती है
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

अपनी फसलो को आधे भाव में बेचकर भी वो किसान हमेशा खुश रहता है
क्योकि उसे अपनी कमाई से ज्यादा दूसरो का पेट भरने में आनंद आता है
हैप्पी किसान दिवस

चिर देता है धरती, सूखता नहीं उसका पसीना
आराम के लिए किसान को मिलाता नहीं महिना
हैप्पी फार्मर डे

कहाँ छुपा के रख दूँ मैं अपने हिस्से की शराफ़त
जिधर भी देखता हूँ उधर बेईमान खड़े हैं
क्या खूब तरक्की कर रहा हैं अब देश देखिये
खेतो में बिल्डर और सड़को पर किसान खड़े हैं
हैप्पी किसान दिवस

हमने भी कितने पेड़ तोड़ दिए, संसद की कुर्सियों में जोड़ दिए
कुआँ बुझा दिए, नदियाँ सुखा दिए, विकास की ताकत से कुदरत को झुका दिए
किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

Kisan Attitude Status

मुल्क मे जो सब से ज्यादा परेशान है.
उसी मेरे भाई का नाम किसान है.

हमने भी कितने पेड़ तोड़ दिए,
संसद की कुर्सियों में जोड़ दिए,
कुआँ बुझा दिए, नदियाँ सुखा दिए,
विकास की ताकत से कुदरत को झुका दिए.

ये मौसम भी कितनी बेईमान हैं,
बारिश न होने की वजह से मरा इक किसान हैं.

छत टपकती हैं उसके कच्चे मकान की,
फिर भी “बारिश” हो जाये, तमन्ना हैं किसान की.

नही हुआ हैं अभी सवेरा, पूरब की लाली पहचान,
चिडियों के उठने से पहले, खाट छोड़ उठ गया किसान.

परिश्रम की मिशाल हैं, जिस पर कर्जो के निशान हैं,
घर चलाने में खुद को मिटा दिया, और कोई नही वह किसान हैं

किस लोभ से “किसान” आज भी, लेते नही विश्राम हैं,
घनघोर वर्षा में भी करते निरंतर काम हैं.

बढ़ रही हैं कीमते अनाज की,
पर हो न सकी विदा बेटी किसान की.

ग़रीब के बच्चे भी खाना खा सके त्योहारों में,
तभी तो भगवान खुद बिक जाते हैं बाजारों में.

दीवार क्या गिरी किसान के कच्चे मकान की,
नेताओ ने उसके आँगन में रस्ता बन दिया.

कहाँ छुपा के रख दूँ मैं अपने हिस्से की शराफ़त,
जिधर भी देखता हूँ उधर बेईमान खड़े हैं,
क्या खूब तरक्की कर रहा हैं अब देश देखिये,
खेतो में बिल्डर और सड़को पर किसान खड़े हैं.

किसान के लड़के ने अपने नाम के आगे “डाक्टर” जोड़ लिया,
गाँव में हल ने कोने में पड़े-पड़े दम तोड़ दिया.

ज़िन्दगी के नगमे कुछ यूँ गाता,
मेहनत मजदूरी करके खाता,
सद्बुद्धि सबको दो दाता,
हम है, अगर हैं अन्नदाता.

क्या दिखा नही वो खून तुम्हें,
जहाँ धरती पुत्र का अंत हुआ,
सच को ये सच नही मान रहा,
लो आँखों से अँधा भक्त हुआ.

किसान की समस्या खत्म नही होती,
नेताओ के पास पैकेज अस्सी हैं,
अंत में समस्या खत्म करने के लिए,
किसान चुनता रस्सी हैं.

किसान खुल के हँस तो रहा हैं फ़क़ीर होते हुए,
नेता मुस्कुरा भी न पाया आमिर होते हुए.

फूल खिला दे शाखों पर, पेड़ों को फल दे मालिक,
धरती जितनी प्यासी हैं उतना तो जल दे मालिक.

चीर के जमीन को, मैं उम्मीद बोता हूँ.
मैं किसान हूँ, चैन से कहाँ सोता हूँ.

कितने अजब रंग समेटे हैं, ये बेमौसम बारिश खुद में,
अमीर पकौड़े खाने की सोच रहा हैं तो किसान जहर.

कीमत तो खूब बड़ गई शहरों मे धान की,
बेटी विदा न हो सकी फिर भी किसान की.

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